ना झुकना कभी खुद मैं
दर्द इससे बड़ा न होता कोई
खुद पे विस्वास हो हर पल तो हित साधता कोई
चट्टान भी रहता खड़ा धुप को सहेजे खुद में हर पल
पर आखिर ठहरा वक्त का गुलाम ;जो घिस जाता
तो क्या हुआ घिसाव निर्माण से ही तो हैं सुनिश्चित
क्या हो सका बदलाव इसमें; हो भरपूर प्रयाश हर पल
वक्त को सम्मानित कर ; क्योंकि वक्त ही सोना हैं
हर पथ जाता खुदी से होकर ; मन तो चालक हैं
तो सही हैं क्या और गलत क्या सोच यह और आगे बढ़ !!!!
दर्द इससे बड़ा न होता कोई
खुद पे विस्वास हो हर पल तो हित साधता कोई
चट्टान भी रहता खड़ा धुप को सहेजे खुद में हर पल
पर आखिर ठहरा वक्त का गुलाम ;जो घिस जाता
तो क्या हुआ घिसाव निर्माण से ही तो हैं सुनिश्चित
क्या हो सका बदलाव इसमें; हो भरपूर प्रयाश हर पल
वक्त को सम्मानित कर ; क्योंकि वक्त ही सोना हैं
हर पथ जाता खुदी से होकर ; मन तो चालक हैं
तो सही हैं क्या और गलत क्या सोच यह और आगे बढ़ !!!!