झकझोर के रख दो इस बार
प्रयास मैं हो तुम्हारे इतना धार
हर पल का प्रहार समेटना तुमको
हो रहा प्रबल विस्वास खुद पर
फर्ज की गठरी रास्तें पर पड़ी हैं
पर पहले बदलाव जरुरी हैं
खुद मैं एक धनात्मक बदलाव की श्रंखला
चला दो बवंडर ऐसा हर पल भरपूर
सम्पूर्णता तो नही आती पर प्रयास हो प्रचुर
तुम ही रचियता खुद के ;दूसरा न कोई साथी
हर कदम पर हैं जिम्मेदारी खुद की तोहफा हैं असल यही
चाहें जोड़ लो या तोड़ लो , यही से होगा मार्ग प्रसस्त
खुद का गुरु स्वमेव तुम्ही ; विकटता से क्या भय
जो नही जगे अब भी तो क्या मतलूब हैं
उठ जाओ मानुष की हर पल हो तुम प्रबल
लागों कार्यो के पूर्णता की झड़ी अबसे
आलिंगन करे लछ्य तुमसे इस बार ऐसे
जैसे स्वाति को एक बूंद का हो इंतजार
तुम ही विधाता ; स्वामी भी तुम ही खुद के
तो चलो आज फिर से पूर्ण होकर
चलो लछ्य पथ पर नया सृजन हेतु लेकर !!!
प्रयास मैं हो तुम्हारे इतना धार
हर पल का प्रहार समेटना तुमको
हो रहा प्रबल विस्वास खुद पर
फर्ज की गठरी रास्तें पर पड़ी हैं
पर पहले बदलाव जरुरी हैं
खुद मैं एक धनात्मक बदलाव की श्रंखला
चला दो बवंडर ऐसा हर पल भरपूर
सम्पूर्णता तो नही आती पर प्रयास हो प्रचुर
तुम ही रचियता खुद के ;दूसरा न कोई साथी
हर कदम पर हैं जिम्मेदारी खुद की तोहफा हैं असल यही
चाहें जोड़ लो या तोड़ लो , यही से होगा मार्ग प्रसस्त
खुद का गुरु स्वमेव तुम्ही ; विकटता से क्या भय
जो नही जगे अब भी तो क्या मतलूब हैं
उठ जाओ मानुष की हर पल हो तुम प्रबल
लागों कार्यो के पूर्णता की झड़ी अबसे
आलिंगन करे लछ्य तुमसे इस बार ऐसे
जैसे स्वाति को एक बूंद का हो इंतजार
तुम ही विधाता ; स्वामी भी तुम ही खुद के
तो चलो आज फिर से पूर्ण होकर
चलो लछ्य पथ पर नया सृजन हेतु लेकर !!!
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