Wednesday, February 8, 2012

LIFE













क्या  हैं ये जिन्दगी के रंग..!
एक पल भरे भरे से ये एक पल  कम !
खो  जाते हैं हम भी अपने  साए  में उस पल!
जिस पल मालूम पड़ता की यही  हैं वो रंग !!
सुने रास्ते हर पल ; हाशिये पे रहते यहाँ रिश्ते !
फिर भी जीवन  का मंजर करवट बदलता रहता !!
और बार बार अपने आप से प्रश्न पूछने को कहता !
क्या बिगड़ी सी मेरी मौलिकता सुधरेगी एक बार और ?
क्या वो पथ जो अनसुलझे  से लगते ; सुधरेंगे एक बार और ?
इन्ही  रंगों को समेटता चलता और जिन्दगी से नए वादे किये चलता !
इन्ही रंगों से सरोबर  हैं जिन्दगी और फिर  क्या कहें ??
जीने  का नाम हैं जिन्दगी !!!!!!!! 
                                               अभिषेक तिवारी

 

 
 

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