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वास्तविकता से दूर वीरान से जंगल में यूँही जाने को जी चाहता हैं!
ख़ामोशी मैं चुपचाप डूबजाने को जी चाहता हैं!!
क्या हैं इस ज़माने की मौलिकता जो हर छन भेद बदलती !
हर बार इस मासूम से अंतर्मन को नए प्रश्न देती!!
इन प्रश्नों से ही भाग जाने को जी चाहता हैं !
अपने आप के साए को भी नहीं चाहता देखना !
इस कदर भागने को जी चाहता हैं !!
वास्तविकता से दूर ..................................जी चाहता हैं !!
हर बार जाना तो चाहता हूँ मंजिल के पीछे !
पर क्या बात हैं जो रोकना रास्ता चाहता हैं ??
वास्तविकता से दूर .............. जी चाहता हैं !!
कहते हैं डूब जाओ खुद में पाने को मोती !
वही मोती जो किस्मत को हैं जोडती !!
पर क्या हैं वो बात जो पथ रोकना चाहता हैं !
वास्तविकता से दूर .............. जी चाहता हैं !!
अभिषेक तिवारी





