Tuesday, January 10, 2017

धोखा


दर्द आखो मे दिखता
लहु बन रगो मे दौडता
जब धोखा मिले कभी है
शब्द नही सुझते वाक्य नही मिलते
कहने को क्या कहे
जब बिल्कुल सन्न रह जाते हम
जब दिन मे रात लगने लगे
धोखा ऐसे ही असर डालता है
जीवन को जहर बनाता है
ना बुझे ऐसा आक्रोश जगाता है
जब कोई धोखा खाता है

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