मनुष्य के नियम बडे अजीब है
जहा देखे मौका वहाँ दौडे है
जो है पहले से उसे छोडे है
इस भरे आपाधापी मे जीवन जीये है
जो नही है पाना उसे पा लेता
जिसे हो जरूरी पाना छोड देता
क्या करता और क्या कराता
जीवन को उत्पात सा बनाता
हजारो दिल तोडता कुछ दिल जोडता
क्या जीवन जीता मनुष्य है
क्या तु जीवन मे पाता
अवसर और काँटो मे भेद नही कर पाता
मानव तु कैसा जीवन जीता!!
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