प्रकृति के रूप
देखो
कितने अनोखे कितने प्यारे
कभी वर्षा तो कभी ठण्डी
कभी गर्मी तो कभी बसंत बयार
निरसता जीवन के हर लेती ये
हर दिन नये परिवर्तन करती ये
हमारी सोच मे फर्क डालती ये
हमारे पहनावे बदल देती ये
हमारा खान पान बदल जाता
जब बदले प्रकृति अपना रंग
कर लो प्यार इस प्रकृति से तुम
करो अपने दायित्वों का निर्वहन
कुडा कचडा का हो सही निस्तारण
गाड़ीयो की संख्या कर दो कम
थोडा करिब तो आओ प्रकृति के
फिर देखो ये कैसे मोहे हम सबका मन!
कितने अनोखे कितने प्यारे
कभी वर्षा तो कभी ठण्डी
कभी गर्मी तो कभी बसंत बयार
निरसता जीवन के हर लेती ये
हर दिन नये परिवर्तन करती ये
हमारी सोच मे फर्क डालती ये
हमारे पहनावे बदल देती ये
हमारा खान पान बदल जाता
जब बदले प्रकृति अपना रंग
कर लो प्यार इस प्रकृति से तुम
करो अपने दायित्वों का निर्वहन
कुडा कचडा का हो सही निस्तारण
गाड़ीयो की संख्या कर दो कम
थोडा करिब तो आओ प्रकृति के
फिर देखो ये कैसे मोहे हम सबका मन!
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