Thursday, January 12, 2017

आज का युवा

हालातो के मारे किस्मत के सहारे जब एक युवा
कंपनी कंपनी भटकता है नौकरी के लिये
हर एक जगह से झुठे आश्वासन पाता है
वो उस समय विज्ञान के अध्याय नी याद कर पाता
जिन्दगी उसको नये पाठ सिखाती है
भुले बिसरे उस युवा को नौकरी मिल भी गई
तो जो उसने आज तक पढा है ना उसका कोई महत्व ना होता
वो कंपनी मे बैठ कर एक्सेल सीट भर रहा होता
या तो दुनिया भर की राजनिती सीख रहा होता
सेहत भी तो धोखा देती ही है
ये धोखा जब मिलता तो कुछ रटा रटाया याद नही आता
पढा लिखा आदमी भी बहुत बेबस और लाचार लगता
अरे यही लाचारी देखने को मेहनत करते हम
ये कैसी शिक्षा जो स्वास्थ्य से संबंधित बोध ना कराये
ये कैसी शिक्षा जो हमे हमारे अधिकार ना दिलाये
और सारा बंटाधार ये पैसे की भुखी जनता करती
ना आपको शुद्ध भोजन मिलता ना रहने को छत
जब आप घर छोड बाहर निकलते
तैयारी किसी एक्जाम की करने को कमर कसते
सब कुछ एक बहुत बडा दर्शन है
एक बडा सा कन्फ्युजन है
हमने तो कर ली पुरी पढाई अपनी
नई पौध को ये मेरा मैसेज है
हर हिस्सो को वरियता देना
इस वक्त कि जरूरत है!!

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