हालातो
के मारे किस्मत के सहारे जब एक युवा
कंपनी कंपनी भटकता है नौकरी के लिये
हर एक जगह से झुठे आश्वासन पाता है
वो उस समय विज्ञान के अध्याय नी याद कर पाता
जिन्दगी उसको नये पाठ सिखाती है
भुले बिसरे उस युवा को नौकरी मिल भी गई
तो जो उसने आज तक पढा है ना उसका कोई महत्व ना होता
वो कंपनी मे बैठ कर एक्सेल सीट भर रहा होता
या तो दुनिया भर की राजनिती सीख रहा होता
सेहत भी तो धोखा देती ही है
ये धोखा जब मिलता तो कुछ रटा रटाया याद नही आता
पढा लिखा आदमी भी बहुत बेबस और लाचार लगता
अरे यही लाचारी देखने को मेहनत करते हम
ये कैसी शिक्षा जो स्वास्थ्य से संबंधित बोध ना कराये
ये कैसी शिक्षा जो हमे हमारे अधिकार ना दिलाये
और सारा बंटाधार ये पैसे की भुखी जनता करती
ना आपको शुद्ध भोजन मिलता ना रहने को छत
जब आप घर छोड बाहर निकलते
तैयारी किसी एक्जाम की करने को कमर कसते
सब कुछ एक बहुत बडा दर्शन है
एक बडा सा कन्फ्युजन है
हमने तो कर ली पुरी पढाई अपनी
नई पौध को ये मेरा मैसेज है
हर हिस्सो को वरियता देना
इस वक्त कि जरूरत है!!
कंपनी कंपनी भटकता है नौकरी के लिये
हर एक जगह से झुठे आश्वासन पाता है
वो उस समय विज्ञान के अध्याय नी याद कर पाता
जिन्दगी उसको नये पाठ सिखाती है
भुले बिसरे उस युवा को नौकरी मिल भी गई
तो जो उसने आज तक पढा है ना उसका कोई महत्व ना होता
वो कंपनी मे बैठ कर एक्सेल सीट भर रहा होता
या तो दुनिया भर की राजनिती सीख रहा होता
सेहत भी तो धोखा देती ही है
ये धोखा जब मिलता तो कुछ रटा रटाया याद नही आता
पढा लिखा आदमी भी बहुत बेबस और लाचार लगता
अरे यही लाचारी देखने को मेहनत करते हम
ये कैसी शिक्षा जो स्वास्थ्य से संबंधित बोध ना कराये
ये कैसी शिक्षा जो हमे हमारे अधिकार ना दिलाये
और सारा बंटाधार ये पैसे की भुखी जनता करती
ना आपको शुद्ध भोजन मिलता ना रहने को छत
जब आप घर छोड बाहर निकलते
तैयारी किसी एक्जाम की करने को कमर कसते
सब कुछ एक बहुत बडा दर्शन है
एक बडा सा कन्फ्युजन है
हमने तो कर ली पुरी पढाई अपनी
नई पौध को ये मेरा मैसेज है
हर हिस्सो को वरियता देना
इस वक्त कि जरूरत है!!
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