बचपन से जो पढा उसका
विश्लेषण करूं
तो ये पाता हूं कुडा बना दिया जाता हमे
हर तरह के विचारो को गाँठ दिया जाता हमे
इतिहास से शुरू हो भुगोल तक नाचती जिन्दगी
गणित और विज्ञान मे चक्कर लगाती
हर कक्षा मे हो जाता अपग्रेडेसन
सवालो के स्तर का हो जाता प्रमोशन
जिन्दगी इन सवालो के बीच कब इक्किस बसंत देख लेती
अंदाजा भी नही होता
प्लेसमेंट मे प्रश्न भी हालाँकि यही से पुछे जाते
पर जिन्दगी के महायुद्ध का हथियार नही देते
साहस और निर्णय छमता का बोंध नही मिलता
त्याग और आत्मनिर्भर होने का पाठ कम दिखता
तो ये पाता हूं कुडा बना दिया जाता हमे
हर तरह के विचारो को गाँठ दिया जाता हमे
इतिहास से शुरू हो भुगोल तक नाचती जिन्दगी
गणित और विज्ञान मे चक्कर लगाती
हर कक्षा मे हो जाता अपग्रेडेसन
सवालो के स्तर का हो जाता प्रमोशन
जिन्दगी इन सवालो के बीच कब इक्किस बसंत देख लेती
अंदाजा भी नही होता
प्लेसमेंट मे प्रश्न भी हालाँकि यही से पुछे जाते
पर जिन्दगी के महायुद्ध का हथियार नही देते
साहस और निर्णय छमता का बोंध नही मिलता
त्याग और आत्मनिर्भर होने का पाठ कम दिखता
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