Thursday, January 12, 2017

जिन्दगी यूँही बढती है

बवंडर की माफिक है जिन्दगी
क्या कब सामने आ जाए नी पता
किस दिशा मुड जाये नही पता
किस सोच मे हम पड जाये नही पता
बस विचारो के बादल उमडते घुमडते
कभी कभी वर्षा भी कर देते
जीवनचक्र चलता रहेगा
हम बवंडर मे नाचते रहेंगे
हमारा अंत भी और प्रारंभ भी होता रहेगा
कभी सुख कभी दुख कभी विचार शुन्यता
जिन्दगी के ये पहलु चलते रहेंगे
जिन्दगी यूँ ही बढती रहेगी!!

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