युद्ध ही तो लड
रहा है मानव तु
हर सदी से हर सदी तक
कल तुने युद्ध लडा मैदानो मे
आज तु लड रहा अपने आप से
तेरे कर्म आज आसानी से प्रदर्शित हो जाते
तु आज आसानी से मनचाही वस्तु पा जाता
तुझे हर वस्तु का एक मुल्य चुकाना पडता
एक युद्ध लडना पडता स्वयं से
अपनी परिस्थितियों से अपने परिवेश से
नियती निष्ठुर रही प्रारंभ से
तुझे दे के सबकुछ छिन लेना जानती
अब तु बर्दाश्त करना सिख ले
अब तु स्वीकार करना सिख ले
ज्यादा कुछ नही है अब तेरे हाथ मे
युद्ध लड सफल हो विजय को भोग
यही है आज के दौर का सत्य!!
हर सदी से हर सदी तक
कल तुने युद्ध लडा मैदानो मे
आज तु लड रहा अपने आप से
तेरे कर्म आज आसानी से प्रदर्शित हो जाते
तु आज आसानी से मनचाही वस्तु पा जाता
तुझे हर वस्तु का एक मुल्य चुकाना पडता
एक युद्ध लडना पडता स्वयं से
अपनी परिस्थितियों से अपने परिवेश से
नियती निष्ठुर रही प्रारंभ से
तुझे दे के सबकुछ छिन लेना जानती
अब तु बर्दाश्त करना सिख ले
अब तु स्वीकार करना सिख ले
ज्यादा कुछ नही है अब तेरे हाथ मे
युद्ध लड सफल हो विजय को भोग
यही है आज के दौर का सत्य!!
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