हर ओर अधियारा
दिखाई देता
अपनी आखो को जब खुद मे कमी दिखती
हर पत्ता सुखा सा लगता
हवा मन्द सी बहती लगती
सुरज की उष्मा तीक्ष्ण सी लगती
माथे पर शिकन दौड पड़ती
खुद की कमी कितनी प्रलयंकारी लगती
दुनिया मे जब चहूओर हरियाली दिखती
प्रभु मार्ग दो जिस पर चल बढु मै
इस अधियारे से बच चलु मै
खुद को एक दिशा दु मै!!
अपनी आखो को जब खुद मे कमी दिखती
हर पत्ता सुखा सा लगता
हवा मन्द सी बहती लगती
सुरज की उष्मा तीक्ष्ण सी लगती
माथे पर शिकन दौड पड़ती
खुद की कमी कितनी प्रलयंकारी लगती
दुनिया मे जब चहूओर हरियाली दिखती
प्रभु मार्ग दो जिस पर चल बढु मै
इस अधियारे से बच चलु मै
खुद को एक दिशा दु मै!!
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