Thursday, May 10, 2012

प्रयास
















इक प्रयास पुनः लछ्य पथ पर
सुघ्द्तम नए भविष्य को लेकर
क्या किया अब तक और क्या रहा सेष
इस बात का हिसाब कर बंद किताब
की दूरी तो तय अभी लाखो कदमो की हैं करनी
न्य चेतन न्य सा ये मन लछ्य को भरें आँखों में
की जित तो किसी की नहीं तय कुदरत की लेखनी में
यहाँ होता फैसला जज्बो के तर्म्यता से हैं
बढ़ चला लछ्य पथ पे खोले भोहैन
की रात्रि में भी अब विश्राम का क्या प्रयोजन
मित्रता हैं स्वयं से स्वयम के अविष्कार की
संगठन में रखे मन को थामे लगातार आस में
की योग्यता कमानी हो तो प्रयास भी निर्विकार हो
इन अंजान से राहों से गुजरता  हुआ प्रयास हैं
कई चेहरें मिलेंगे इन राहों पे जिनसे जुड़ना भी हैं
चूकी फैसले कई सम्म्तो से होते युक्ति ये हैं
लग जाओ निष्काम भाव से कर्मो में संयत अब से
खुद की खोज का अब बड़ा ही लछ्य प्रधान हैं
खुद की खोज में योजन लाखों पाटने होंगे और
इस चंभंगुर  से मन को रवे लोहे में ढालना होगा
प्रयाश अगला इस पल से ही सुनिश्चित होगा
बढ़ा अंको में आस में बढ़ चला आपके ओर
अब बस चलाना चलते रहना रुकने का क्या छोर!!!!!!

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