Sunday, January 8, 2017

रणक्षेत्र

प्रत्यंचा चढा रे अर्जुन
विरोधी तेरे मार्ग मे है
सुसज्जित है हर औजारो से
तु गाण्डीव से अपने बाणो को छोड
गर्जन कर अपने भिरूता को छोड
दुनिया तुझे कल तेरे वीरता से पुजेगी
कल वो तेरे आज को याद करेगी
तु आज कुछ कर ऐसा जो अनंत हो
जिसकी जडे फैली दुर तक हो
याद कर अपने पुरा शौर्य को
देखो यह समय व्यर्थ ना हो
प्रत्यंचा चढा रे अर्जुन
विरोधी तेरे मार्ग मे है

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