हौसला चाहिए इतना बुलंद
की हो जाये हर सफ़र मुमकिन
ये वक्त का तकाजा हैं आज का
मन की शक्ति से साकार कर सपना
तू न झुका हैं कभी न झुकेगा कभी
तू खुद को कर इतना बुलंद
तू ही खुद का देवता ; जो चाहता हैं तू
साधन हैं तू ले ले वो तू खुद से
अपना मलंद खुदी को कर इतना बुलंद
क्या हैं जो नहीं संभव तुझसे
एक बार झक तो सही अंदर
एक खदान भरा पड़ा हैं यहाँ पे
तुझे खोज रहा प्रतिछन
स्वाति के बहती प्रतिच्छा में तेरे
हैं व्याकुल हर पल दर पल
झक खुद के अंदर हर छन होगा तेरे तबसे
और तू खुद ही बन जायेगा अपना विधाता !!!
अभिषेक तिवारी "अग्यात"
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