ऐ घडी तुझसे एक बात पुछु ?
तू हर पल कैसे सजग रहता हैं!!
हमें हर वक्त का एहसास करता !
तू निर्भय सा हैं !!
समय की चल समझाता हैं
जो न रुकता कभी न थकता कभी
और तो और न किसी का होता हैं
एक पल रजा कोई और दुसरे पल रंक होता हैं
ऐ घडी ..........................................२
हमारी भी चाभिया हैं भरी हुई हैं
और पल दर पल ये खत्म होता जा रहा
पर ना ख़त्म होते हमारे दुर्गुण
ये क्या कठिन पहेली हैं की
जब हल निकले तो जाने का समय हो जाता
ऐ घडी ..................................................!!!!!
अभिषेक तिवारी "अज्ञात"
No comments:
Post a Comment