अपने अस्तित्व को बचाने के जुगत में जुटा!
खुद को एक बार पाने को जगा !!
उम्मीद हैं ,इस बार बारिश होगी इस जमीं पे !
न तो मेरा एक अनलिखा दास्ताँ होगा!!
आरजू को बढ़ा रहा हूँ जलने को !
एक बार फिर हौसला कर आयेने में सजने को !!
अपने अस्तित्व .....................
उम्मीद के सितारों के साथ , की हैं गुफ्तगू इस बार!
देखना बस बाकि हैं ; हौसलों में हैं कितना गुबार !!
चट्टान तो होते ही हैं, टूटने को !
पैमाने तो होते ही हैं ; छलकने को !!
उम्मीद हैं की वक्त के पहिये को मोड़ लूँगा !
अपने अस्तित्व को खोजता , एक तारा समेत लूँगा!!
वैसे भी उम्मीद पे तो ये दुनिया टिकी हैं , मालिक !
हौसलों और जज्बो पर ही तो आज तक पली हैं!!
उम्मीद हैं इस बार बारिश होगी जमीं पे !!!!!!!
अभिषेक तिवारी
उम्मीद हैं ,इस बार बारिश होगी इस जमीं पे !
न तो मेरा एक अनलिखा दास्ताँ होगा!!
आरजू को बढ़ा रहा हूँ जलने को !
एक बार फिर हौसला कर आयेने में सजने को !!
अपने अस्तित्व .....................
उम्मीद के सितारों के साथ , की हैं गुफ्तगू इस बार!
देखना बस बाकि हैं ; हौसलों में हैं कितना गुबार !!
चट्टान तो होते ही हैं, टूटने को !
पैमाने तो होते ही हैं ; छलकने को !!
उम्मीद हैं की वक्त के पहिये को मोड़ लूँगा !
अपने अस्तित्व को खोजता , एक तारा समेत लूँगा!!
वैसे भी उम्मीद पे तो ये दुनिया टिकी हैं , मालिक !
हौसलों और जज्बो पर ही तो आज तक पली हैं!!
उम्मीद हैं इस बार बारिश होगी जमीं पे !!!!!!!
अभिषेक तिवारी
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