Sunday, January 8, 2017

आ जा रे निदिया

आ जा रे निदिया अखियन मे
सपने ले आ सुनहरे
उडूँ उचाँ सपनो मे अपने
कोई भी ना हो सिमाये
ग्रह नक्षत्रो से दूर बहुत
अकाशगंगाओ से परे
शांति मे खो जाउँ मै
उन्मुक्त बिल्कुल हल्का
हवा मे जैसे तैरूं मै
नये नवेली सी जगहे
देखूँ मै इन सपनो मे
आजा रे निदिया इन अखियन मे!

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