Wednesday, January 11, 2017

विज्ञान और आस्था

विज्ञान और आस्था दो अलग पहलु जरूर है
एक जो विश्वास करे सबुत पर
एक जो आत्मा महसुस करे
एक जो प्रयोगशालाओं मे परखा जाये
एक जो जीवन यज्ञ मे दर्शन कराये
दोनो नदियों के दो तट है
जैसे आज विज्ञान प्रगतिशील है
लगभग हर प्रश्नो का उत्तर समेटे है
लगभग हर बाधाओ को तोडे है
हर सुख सुविधा इंसान को प्रदत्त की है
फिर भी इंसान आत्मिक सुख से दुर
घुटन, चिन्ता और अवसाद ग्रस्त है
क्या कारण है इसका क्यो ये नतीजा आया प्रयोगशालाओं तक क्यो ना इसका हल आया
यही पर आस्था होती प्रबल है
ईश्वरीय सत्ता का मिलता अस्तित्व है
आत्मिक सुख का परिचय है मिलता
जो प्रयोगशालाओं मे नही है बनता
इश्वरीय शक्ति को मान लो
स्वयं पर विश्वास करो
शांति के लिये इस राह पर चलो
आस्था को हृदय मे जगह दो
ईश्वरीय शक्ति पर विश्वास दो
जीवन तभी सुगम है
जीवन तभी सफल है
जीवन तभी मुक्त है

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