प्रत्युतर की आकांछा लिए सबल मन प्रश्न तुझसे पूछता हूँ
तू हैं हर छन सबल ये आस्था में रखता हूँ
कही नहीं जाना होता खुद को फरियाद लेकर
ये मन ही खुद बैठा हमारे प्रश्नों के ढेर सारे उत्तर लेकर
बस इसकी आवाज सुन एक बार तू; हौसलों से बेध तू
इन प्रस्नोतारो में छल नही होता गुरुमेव प्रभाव होता
तो क्यों दर दर भटकता रहा मैं इस उलझनों में फिरता रहा में
पर्थ ये ही अनुभव हैं जो तुम्हे मन की महता समझाई
चेतन मैं चेतना और स्वमेव लछ्य पथ पे बढ़ने का भान कराइ
सो अब नही सोना इस मन से अनुभवों को प्रबल करना
की पाटनी अभी बड़ी खाई हैं हौसलों के सेतु से
तो लग जा निष्काम भाव से सतचित लछ्य पथ पे
ये मेरी ही लेखनी हैं विस्वास करूं या की नहीं
तू देख गुरुमेव प्रभाव का समिश्रण फल यही
इस लेखनी को ही अपना राग बना और बढ़ चल
की रुक जाना तो संभव अंत पथ पे जाकर ही
तो पुनह उठ खड़ा हो विस्वास पालें
कुछ भी सम्बह्व यहाँ तो न हर तू मन से
मन में पालें इच्छा की चलतीं बढे ये कदम
चलता चला तू मुस्कुरा तू मुस्कुरा तू !!!!
तू हैं हर छन सबल ये आस्था में रखता हूँ
कही नहीं जाना होता खुद को फरियाद लेकर
ये मन ही खुद बैठा हमारे प्रश्नों के ढेर सारे उत्तर लेकर
बस इसकी आवाज सुन एक बार तू; हौसलों से बेध तू
इन प्रस्नोतारो में छल नही होता गुरुमेव प्रभाव होता
तो क्यों दर दर भटकता रहा मैं इस उलझनों में फिरता रहा में
पर्थ ये ही अनुभव हैं जो तुम्हे मन की महता समझाई
चेतन मैं चेतना और स्वमेव लछ्य पथ पे बढ़ने का भान कराइ
सो अब नही सोना इस मन से अनुभवों को प्रबल करना
की पाटनी अभी बड़ी खाई हैं हौसलों के सेतु से
तो लग जा निष्काम भाव से सतचित लछ्य पथ पे
ये मेरी ही लेखनी हैं विस्वास करूं या की नहीं
तू देख गुरुमेव प्रभाव का समिश्रण फल यही
इस लेखनी को ही अपना राग बना और बढ़ चल
की रुक जाना तो संभव अंत पथ पे जाकर ही
तो पुनह उठ खड़ा हो विस्वास पालें
कुछ भी सम्बह्व यहाँ तो न हर तू मन से
मन में पालें इच्छा की चलतीं बढे ये कदम
चलता चला तू मुस्कुरा तू मुस्कुरा तू !!!!
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