Thursday, May 10, 2012

मेरा प्रयास

तू बहूत दूर बैठा अभी हैं
और लगातार ही मुस्कुरा रहा हैं
मेरी बेसरम व्याकुलता को देख इठला रहा हैं
पर ये जुर्रत बढ़ी अब न कम होने को हैं
और लाख हस ये तो अब तुझे पाने को हैं
चक्रव्यूह हैं रस्ते मैं मेरे ये भी बहन हैं मुझको
पर ये मार्ग जो पकड़ा मैंने हैं आता भी तुझतक हैं
मुज्जे कर शर्मिंदा अभी तू लाख बार हैं
क्यों न हो ये मेरा अभी अस्तित्व ही क्या हैं
कल जब एक बार उजाला होगा सारा अंध भाग जायेगा
इस उजाले को ताके आगे पग मैं बढ़ते जाना होगा
पता हैं कल ये भी हैं मुमकिन की शायद अंध ही हो
तो क्या ये जुर्रत इस बात से कम हो
कुछ दुर्गुण तो थामें मुझको पर क्या रोशनी मैं जुगनू नहीं रेंगते
ये दुर्गुण ही बन्दे तुझको हर छन सबल करतें
इस बात का कर भान हौसलों पे चढ़ा कमान
की ये तीर दूर तक जाने हैं इस बार के प्रयास
लगातार -लगातार कार्यो मैं लगा रहे तू
लछ्य पथ पे चल दे एक बार फिर से'
उन्मुक्त प्रयास सांसो में धर मन में विश्वास लेकर
कल सुनहरी धुप सब सोख लेगी

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