सदीओ से वीरान खड़ा हूँ ऐसा लग रहा हैं
खुद मैं ही इतना डूबा हुआ हूँ क्यों ऐसा लग रहा हैं
मैं तो बना हुआ हूँ ;तेरे लिए ऐ मालिक फिर
ये मेरा खुद में ही रहना ; इसका मुझसे क्या वास्ता
खुला सागर सा रखो मेरा ह्रदय मौला यही प्रार्थना हैं
कई दिलो के जख्मो को समेटना हैं
खुद मैं नही खोना हमको कभी
कुछ खुद से उम्मीदे हैं और कुछ अपने पीछे के लोगो से
पता हैं ? इस समय मैं याद थोड़ी न आने के लायक हूँ
पर मैं बताऊँ आपको मैं ऐसा नही हूँ
बहुत प्यार हैं आप लोगो के लिए इस दिल मैं
इस बात को मैं कैसे बयां कर पाऊँ उलझन हैं मेरी
मैं जानता हूँ की शायद ये बात आप समझते होंगे
की आप लोग ही मेरी जिन्दगी के मायने हूँ
आप लोग के दिए हुए शिछा का कर्जदार हूँ मैं
मौला देना पथ मुझको ऐसा मुझको जो मंजिल तक जाता हो
और भूल के भी किसी का अहित ना हो
सहन शक्ति बढाओ इतना की हर गम लगे छोटा
खुद के शक्ति से इन संसय रूपी चट्टान का कर संकू सामना
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