रात की है घडी
घनघोर है अंधेरा
स्याह मौसम ने डाला डेरा
उम्मीद है टुट रहा
मन यूँही घबरा रहा
पथिक क्या तु ठहर जायेगा?
क्या बीच राह से लौट जायेगा?
तुने कष्ट आधा झेल है लिया
आँधियो से गुजर तु रहा
मन मे हजारो विचारो का हुजुम है उमडा
तु सोच ले समझ ले
हारे का कोई नही सहारा
अब तु देख ले
राह को टटोल ले
अपने दम को परख ले
जिन्दगी का भीषण इम्तिहान आगे
तेरे हर कार्यो का इनाम आगे
तु कदम बढायेगा तो तु ही जिम्मेदार होगा
अपने जय पराजय का साथ देगा
तुने सोच चलना कैसे शुरू किया
किस विचार का लंगर डाल दिया
उसको ही पतवार बना ले
उपर वाले पर भरोसा कर ले
वही खेवेंगे तेरी नईया
तु ही है जो कर्णधार खुदका
तुही स्वयं का मनोबल बढाता
घनघोर है अंधेरा
स्याह मौसम ने डाला डेरा
उम्मीद है टुट रहा
मन यूँही घबरा रहा
पथिक क्या तु ठहर जायेगा?
क्या बीच राह से लौट जायेगा?
तुने कष्ट आधा झेल है लिया
आँधियो से गुजर तु रहा
मन मे हजारो विचारो का हुजुम है उमडा
तु सोच ले समझ ले
हारे का कोई नही सहारा
अब तु देख ले
राह को टटोल ले
अपने दम को परख ले
जिन्दगी का भीषण इम्तिहान आगे
तेरे हर कार्यो का इनाम आगे
तु कदम बढायेगा तो तु ही जिम्मेदार होगा
अपने जय पराजय का साथ देगा
तुने सोच चलना कैसे शुरू किया
किस विचार का लंगर डाल दिया
उसको ही पतवार बना ले
उपर वाले पर भरोसा कर ले
वही खेवेंगे तेरी नईया
तु ही है जो कर्णधार खुदका
तुही स्वयं का मनोबल बढाता
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