परिस्थितियो के
गुलाम ना बन तु मानव
अपन लिये परिस्थितिया खुद पैदा कर
तरकश मे तीर ना हो सही तेरे
युद्ध मे तु अपने मनोबल से लड
थर्रा जाये ये माहौल तेरे उपस्थिति से
कुछ जीवन को जीते जी ऐसा इंतजाम कर
नये नवेले उद्देश्यो से ओतप्रोत हो तु आगे बढ
संग्राम छेड दे नियती से
जो नियती हो ना प्रबल
परिस्थितियों के गुलाम ना हो मानव
अपने लिये परिस्थितियाँ खुद पैदा कर!!
अपन लिये परिस्थितिया खुद पैदा कर
तरकश मे तीर ना हो सही तेरे
युद्ध मे तु अपने मनोबल से लड
थर्रा जाये ये माहौल तेरे उपस्थिति से
कुछ जीवन को जीते जी ऐसा इंतजाम कर
नये नवेले उद्देश्यो से ओतप्रोत हो तु आगे बढ
संग्राम छेड दे नियती से
जो नियती हो ना प्रबल
परिस्थितियों के गुलाम ना हो मानव
अपने लिये परिस्थितियाँ खुद पैदा कर!!
No comments:
Post a Comment