तुम
जब आना
कठोर
होके आना
कइ
जख्म दिखेंगे
इस
अन्तर्मन मे
समय
की मार से
मेरी
आखे पथराइ होंगी
वक्त
के छोर ढुढते हुए
कइ
सपनो मे उलझा
शायद
अनमना दिखुंगा
धरोहर
ऐसी मिलेगी तुम्हे
तुम
जब आना
कठोर
होके आना
बडी
जज्बातो से खोजता
रहा
हूं तुम्हारे वजुद को
जो
एक अनसुलझी सी
पहेली
सी लगी मुझको
चेहरो
के अक्स छाने
कोइ
नही है ठिकाना
मै
कठोर हो चुका हूं
भाव
मन के सुखे
तुम
जब आना
कठोर
होके आना
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